सभी धर्मप्रेमी हिन्दू समुदाय को दशांश यज्ञ के महत्व की जानकारी प्रस्तुत करता हूं।

अपने सनातन हिन्दू धर्म की जब स्थापना हुईं, तब ब्रह्मा, विष्णु, और महादेव ने मिलकर ब्रह्मा के चार संतानो को ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र के नाम से चार वर्णों में व्यवस्थित किया। इसके बाद चारो वर्णो ने त्रिदेव से प्रार्थना की कि हमारे जीवन का उद्देश्य क्या होगा? तब त्रिदेव ने मनुष्य के सत्कर्म, पुण्य, जप-तप आदि सत्कार्य के बारे में बताया और सृष्टि के सभी जीवो के कल्याण के लिए अर्जित पुण्य का १०% देवताओ को अर्पित करने का सुझाव दिया, और अपनी कमाई का १०% राजकोष में जन कल्याण के लिए अर्पित करने को कहा। इस अर्पण को दशांश दान समर्पण और होम का नाम मिला, बाकी बचे पुण्य से हर जीव का भाग्य (प्रारब्ध) बनता है। और दशांश धन अर्पित करने के बाद बचे हुए धन से जीवन निर्वाह करने का और जीवन निर्वाह करते हुए बचा हुआ धन परिवार और जनकल्याण के लिए अर्पित करने का सुझाव दिया। इसे भी दशांश कहते हैं। इस कर्मो से अगले जन्म का जीवन भाग्य बनता है। इस तरीके से हमारे किए हुए कर्मो को इस सृष्टि के सभी जीवों को, ईश्वर सुख शांति प्रदान करते हैं। जो मनुष्य अपना जीवन निःस्वार्थ भाव से परमार्थ के लिए जीता है और अपने सत्कार्य से जीवन का फल जनकल्याण को समर्पित कर देता है तो उसके भाग्य में अगले जन्म के लिए कुछ नहीं बचता। तब ईश्वर ऐसे जीवआत्मा को जन्म मृत्यु से मुक्त कर देता है। इसे हम संसार में मुक्ति कहते है। इस महात्मय को जनकल्याण के उद्देश्य से हम सब मिलके महामृत्युंजय मंत्र के दशांश यज्ञ में सम्मिलित हो के महापुण्य का कार्य करे , जिससे यज्ञ से अर्जित पुण्य से सभी हिन्दुओ को सुख, शांति मिले । कोरोना जैसे महामारी से रक्षा हो। इसी परमार्थ की भावना से इस कार्य का आयोजन किया गया है। सभी हिन्दुओं का कल्याण हमारा उद्देश्य है अतःइस कार्य को हम सब मिलके महा अक्षय-पुण्य को प्राप्त करे, यही हमारी कामना है।