सभी भाईओ ओर बहनों को महादेव हर जय श्री कृष्ण।
परम पुज्य भाईश्री रमेशभाई औज़ा की श्रीमद भागवत कथा की सर्वे हिन्दुओ का कल्याण के उद्देश्य से श्री ब्रह्मविकास चेरीटेबल ट्रस्ट - जामनगर द्वारा समस्त ब्राह्मण समाज संगठन, इंडिया के सहयोग से ओर सांदीपनि आश्रम पोरबंदर के सहयोग से निःशुल्क सर्वे हिन्दु परिवार के पितृ को तृप्त करने हेतु।
सभी हिन्दु परिवार में गृह शांति, सुख शांति, कल्याण की भावना से आयोजन निःशुल्क किया गया है। ये कार्य निःशुल्क रखने के कारण कही हिन्दुओ के द्वारा हमारे पास प्रस्ताव आया है आप क्यो हमारा चंदा नहीं लेते इसी कारण हम स्पष्टता करने के लिए ये कथा प्रस्तुत करता हुँ। हमारे ब्रह्मसमाज संगठन ने ओर ट्रस्ट की मीटिंग में ये ब्रह्माजी की कथा ब्राह्मणों को सर्वे ब्राह्मणों को बड़े भाई की भूमिका अदा करने का महात्म्य है। सर्वे हिन्दुओ की प्रागट्य कथा को ध्यान में रखते हुए इस कार्य का खर्च ब्राह्मण करेंगे सर्वे हिन्दुओ का कल्याण करने का उदेश्य रखा गया है।
हिन्दु समाज की प्रागट्य कथा इस तरीके से है। ब्रह्माजी ने इस सृष्टि में प्रथम प्रागट्य ब्राह्मण का किया तब ब्राह्मण ऋषि स्वरुप में जीवन शुरु किया, कठोर तपश्या ईश्वर साधना से ब्रह्मा, विष्णु, महादेव त्रिदेव ने ऋषिकुमारों को देवता स्वरुप में ब्रह्मांड में स्थान दिया। कश्यप ऋषि के पुत्र को सूर्यनारायण देव का स्थान मिला। इंद्रदेव को देवो का राजा का स्थान मिला। पौत्र को धर्मराज(यमराज) ओर शनिदेव का स्थान मिला अत्रि ऋषि के पुत्र को चंद्रदेव का स्थान मिला। ओर ऋषिओ को गुरु बृहस्पति का स्थान मिला गुरु शुक्राचार्यजी का स्थान मिला। कश्यप ऋषि के असुर पौत्र को राहुदेव, केतुदेव का स्थान मिला ब्रह्मापुत्र को अग्निदेव ओर वायुदेव अन्य तपस्वी ऋषिओ को नक्षत्र देवता ओर ग्रह देवता का स्थान मिला। इसी स्वरुप से ब्रह्मांड में ब्राह्मण देवता के रुप में स्थापित हुए इस सृष्टि में रहने वाले ब्राह्मणों को भुदेव के रुप में स्थापित किया कुछ समय बीतने के बाद कश्यप ऋषि के श्राप के कारण अपनी पत्नी के गर्भ से ब्राह्मण कुल में असुरो का जन्म हुआ। असुर कठोर तपस्या करके ऋषि संतान होने के कारण जप-तप से ब्रह्मा ओर महादेव से वरदान प्राप्त करके इस सृष्टि में बलवान हो गए। ओर अपनी शक्तिओ का अपने ही भाई तप यग्न करने से रोकने लगे उनका उदेश्य ये था के ब्राह्मण तप-यग्न नही करेंगे तो उनकी शक्ति बढ़ेगी नहीं ओर हम ही बलवान रहेंगे। ब्राह्मण ऋषिओ भी शक्तिवान थे तो दोनों के बीच युद्ध होता रहा इस समश्या का निवारण के लिए सभी देवता, ब्राह्मण ओर ऋषिओं पितामा ब्रह्माजी के पास गए ओर प्रार्थना की, आपके ओर महादेव के वरदान से असुर हमे धर्म कार्य नहीं करने दे रहे। हमारा समय धर्म कार्य नहीं कर पाते है ओर वो हमसे ज्यादा शक्तिशाली है आपके वरदान से तो हमारी रक्षा करे ओर इस समस्या का निवारण करे।
तब ब्रह्माजी भगवान विष्णु को साथ लेके महादेव के पास गए। ये समस्या का निवारण करने के लिए महादेव से प्रार्थना की तब महादेव ने ब्रह्माजी को आज्ञा दी के संसार का विकास करे। तब ब्रह्माजी ने क्षत्रियों का प्रागट्य किया ओर वैश्य का प्रागट्य किया ओर शूद्र का प्रागट्य किया इस तरीके से इस सृष्टि में भगवान ब्रह्माजी के चार संतान के स्वरुप में इस सृष्टि में आए। ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र चारो ने त्रिदेव से प्रार्थना की अब हमारा जीवन उद्देश्य क्या? तब त्रिदेवने क्षत्रियों को अपनें तीनो भाईओ की रक्षा की, ओर धर्म रक्षा करने का दायित्व सौंपा। तब ब्राह्मणों ने अपनी तपस्या से प्राप्त किये हुए शस्त्रो, शक्तिओ, ब्रह्मास्त्र, जैसी शक्ति प्रदान की। त्रिदेव ने अशुरी शक्तिओ से उन तीनों भाई की रक्षा के लिए रक्षण करने की शक्ति का आशीर्वाद दिया।ओर वैश्य को तीनों भाई की आवश्यकता जीवन निर्वाह की सभी चीजों का आदान प्रदान करने का कार्य सौंपा। शूद्र को पुरी सृष्टि को संभालने का ओर वो सृष्टि से अपने तीनों भाईओ की जरुरत की खेती करके भरण पोषण करने का दायित्व सौंपा। क्षत्रियों को इस सृष्टि का राजभार सौपते हुए राज सेवक के रुप में नियुक्त किया। ब्राह्मणों को इन तीनों भाई के संतानो को शिक्षा, धर्म पारायण, संस्कार, जेसी विद्या दे कर इस सृष्टि में प्रेम ओर भाई-चारे का ओर धर्म का स्थापन करने की जवाबदारी सौपीं। ओर तीनों भाइयों से कोई दुष्कर्म हो जाए तो प्रायश्चित करवाके अपने धर्म तप पुण्य से ओर अपनी विद्या से उन्हें कर्म से धर्ममय बनाये रखने का सर्व सृष्टि का कल्याणकारी कार्य करने का दायित्व सौंपा।
सभी चारो भाइयों अपनी संपत्ति से दशांश भाग अपने भाइयों के कल्याण के लिए अर्पित करने की बात कहीं। इस तरीके से चारो भाईयो का इस संसार में सुख शांति, स्थापित करने करके अपना अपना दायित्व निभाए। ओर इस तरीके से इस संसार में ब्रह्माजी के चारो संतान हम सब हिन्दु कहलाए। ओर सनातन धर्म बना। ओर हिन्दु में चार भाई में ब्राह्मण का बड़े भाई का दायित्व निभाने की ज़िम्मेंदारी है। ओर सबको अपनी शक्ति से जनकल्याण करने का दायित्व है। समस्त ब्राह्मण समाज संगठन, ओर श्री ब्रह्मविकास चेरीटेबल ट्रस्ट ने नागेश्वर ज्योतिर्लिंग शिवालय, द्वारिका भगवान कृष्ण की कर्मभूमि में सर्व हिन्दु जनकल्याण सर्व हिन्दुओ के पितृ की तृप्ति के लिए श्रीमद भागवत कथा ओर कोरोना जैसी महामारी से रक्षण के लिए हमारे सर्वे हिन्दु भाइयों की मंगल कामना सबको साथ जोड़के महामृत्युंजय दशांश महायग्न का आयोजन किया गया है। ये कार्य में हमारे संगठन के ब्राह्मण भाईयों ने ये तय किया है। कि बड़े भाई की भूमिका अदा करते हुए हमारा दायित्व समझते हुए ये कार्य करने के लिए आर्थिक हम लोग समर्थ है। तो सर्व हिन्दुओ को इस कार्य में निःशुल्क जोड़के महापुण्य का हिस्सेदार बनाये। इस पुण्य से महादेव की कृपा से भगवान कृष्ण की कृपा से सभी हिन्दु परिवारों में सुख शांति, संस्कार समृद्धि के साथ महा रोगों से रक्षण प्राप्त हो इसी भाव से श्रध्दा से हम ये कार्य कर रहे है। ये कार्य में सांदीपनि आश्रम-पोरबंदर परम पूज्य भाईश्री रमेशभाई औज़ा ब्राह्मणों के महर्षि के स्वरुप में बिराजमान है। ओर जनकल्याण के महारथी है उन्ही के सहयोग से ये महा अक्षयपुण्य हम सब को प्राप्त करने का अवसर बना है।
सर्वे हिन्दु भाईयों को प्रार्थना है, ईश्वरीय शक्तिओ को महादेव ओर ब्रह्माजी की हम सब कृपा पाए। उनकी कृपा से सर्वे हिन्दुओ का मंगल हो यही कामना है।
ली।
श्री ब्रह्मविकास चेरीटेबल ट्रस्ट - जामनगर
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